‘जलवा जिसका कायम है, उसका नाम मुलायम है’ का राजनीतिक सफर अंतिम पड़ाव में, पढ़िए पूरा घटनाक्रम

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वैसे उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुलायम सिंह की पहचान ज़मीनी नेता की रही। उत्तर प्रदेश के इटावा के एक सामान्य परिवार में 1939 में जन्मे मुलायम को बचपन में पहलवानी का शौक था, राजनीति विज्ञान में एमए किया, स्कूल में शिक्षक भी रहे।

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इस दौरान राम मनोहर लोहिया का उन पर प्रभाव पड़ा और 1967 में वे सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर महज 28 साल की उम्र में विधायक बन गए।

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इसके बाद मुलायम ने अपने जीवन में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी पहचान यादवों और मुस्लिमों के सबसे बड़े नेता के तौर बन गई। 1990 में कारसेवकों पर गोली चलवाने के बाद वे उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के बड़े नेता बने। लोग उन्हें मौलाना मुलायम और मुल्ला मुलायम तक कहने लगे।

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